अजब नगर निगम के गजब अफसर

Shekhar Sharma
3 Min Read

जेसीबी से पाइप डेमेज होने से पानी की बर्बादी, निगम के जलकर अधिकारी बोले मेरा नहीं काम , कोई अफसर कॉल रिसीव करने काे तैयार नहीं

मेरठ। नगर निगम अजब है और इसके अफसर गजब हैं। महानगर की पब्लिक को भले की कितनी ही मुसीबत क्यों ना उठानी पड़े लेकिन निगम के अफसर, क्या मजाल है कि पब्लिक की फोन काल्स को रिसीव कर लें या पलटकर जवाब दें दें। यह दशा तो तब है जब सीएम योगी आदित्यनाथस के सख्त आदेश हैं कि सीयूजी नंबर पर आने वाले प्रत्येक कॉल अफसर रिसवी करेंगे। यदि किसी कारणवश कॉल रिसीव नहीं की जा सकती तो जैसे ही समय मिले उस कॉल का उत्तर देंगे, लेकिन यहां तो मामला सरकारी पानी की बर्बादी का था, उसके बाद भी कॉल को रिसीव नहीं किया गया।

ये है मामला

महानगर के शारदा रोड वार्ड 39 माता का बाग: रदा रोड अगरवाल कंपलेक्स गीता जैन डॉक्टर के ठीक सामने वाला माता का बाग इलाके में नगर निगम के निर्माण विभाग की जेसीबी की चपेट में आकर सरकारी पेयजलापूर्ति करने वाली पाइप लाइन डेमेज हो गयी। वहां से पानी निकलना शुरू हो गया। घंटों पानी रिसता और यह बादस्तूर जारी है। इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता व आरटीआई एक्टिवस्ट मनोज कुमार ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए पाइप डेमेज की सूचना नगर निगम के अफसरों तक पहंचाने का प्रयास किया। मनोज ने बताया कि उन्होंने करीब क्षेत्र संबंधित अधिकारी जलकर सूरज प्रजापति जी को सूचना दी

मेरा काम नहीं-निर्माण का नंबर नहीं

बकौल मनोज कुमार जलकर अधिकारी सूरज प्रजापति ने कह दिया कि यह मेरा काम नहीं निगम के निर्माण विभाग का है। और रही बात निर्माण विभाग की तो निगम के निर्माण विभाग के किसी अफसर या कर्मचारी का नंबर मेरे पास नहीं। मनोज बताया कि उसके बाद निर्माण विभाग में मुख्य लिपिक आलोक शर्मा से बात हुई उन्होंने कहा मैं भी यही को सूचना देता हूं भी ठीक करता हूं। करीब तीन बजे के बाद यह बातचीत हुई थी, लेकिन शाम सात बजे तक भी ठेकेदार नहीं पहुंचा। जब रात आठ बजे उन्हें कॉल किया तो कॉल रिसीव करना ही मुनासिब नहीं समझा और टूटी पाइप लाइन से इलाके में पानी का रिसाव होता रहो। थक हारकर स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अमर सिंह कई कॉल की लेकिन उन्होंने भी कॉल रिसीव नहीं की।

सीएम से करेंगे शिकायत

मनोज ने बताया कि नगर निगम के अफसरे के रवैये की शिकायत वह सीएम के आईजीआरएस पोर्टल पर करेंगे। इतना ही सीएम पोर्टल पर यह भी बताया जाएगा कि सीएम ने भले ही आदेश दिए हों, लेकिन सीएम के आदेश के बाद भी निगम के अफसर सीयूजी पर किए जाने वाली कॉल को रिसीव नहीं करते हैं। इससे तो अच्छा यही होता कि सीएम इस आश्य के आदेश ही नहीं करते।

Share This Article