
कराची और सिंध में दोबार से आबाद हो रह हैं पुराने और खंडहर हो चुके गुरुद्धारे, सिख बनने वाले हिन्दुओं की पाकिस्तानी मुसलमान करत हैं खिदमत
नई दिल्ली। पाकिस्तान में कई हिंदू (विशेष रूप से सिंध और बलूचिस्तान के नानकपंथी) अपनी स्वेच्छा से सिख धर्म अपना रहे हैं। वे ऐसा सामाजिक उत्थान, बेहतर आर्थिक सहयोग, गुरु नानक देव जी की सार्वभौमिक शिक्षाओं और समुदाय की मजबूत एकजुटता से प्रेरित होकर कर रहे हैं। पाकिस्तान के कराची और उससे सटे इलाकों में रहने वाले हिन्दू तेजी से सिख धर्म अपना रहे हैं। ऐसा करने वाले हिन्दुओं का दावा है कि इससे उन्हें पाकिस्तान में बहुत सम्मान मिल रहा है। वो बताते हैं कि “जब हम शहर में निकलते हैं तो पता नहीं कितने लोग हाथ में लस्सी के गिलास के साथ आते हैं और कहते हैं कि खा लो सरदार, हमारे साथ बैठो और बहुत प्यार देते हैं. यही कारण है कि हम सिख बन गए।” करीब सौ ऐसे हिन्दू परिवार बताए जाते हैं जो अब सिख धर्म अपना चुके हैं। ऐसे हिन्दुओं जिन्होंने सिख धर्म अपना लिया है उनके लिए पाकिस्तान और दुनिया के दूसरे देशों में रहने वाले सिख समुदाय भरपूर मदद भेज रहा है। इस रकम से वो गुरुद्धारा बना रहे हैं। गुरूद्धारा भी इतना बड़ा है कि एक साथ एक हजार से ज्यादा लोग वहां बैठ जाएं। जहां गुरुद्धारा बनाया जा रहा है वहां पास में ही दो मंदिर भी हैं।
भेदभाव के चलते बने सिख
पाकिस्तान में सिख समुदाय को एक अलग और सम्मानित अल्पसंख्यक पहचान के रूप में देखा जाता है। उन्हें राष्ट्रीय जनगणना में भी अलग पहचान मिली है। नानकपंथी हिंदू सदियों से ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ में आस्था रखते आए हैं और गुरुद्वारों में जाते रहे हैं, जिससे उनके लिए यह बदलाव काफी स्वाभाविक रहा है। कराची और आसपास के जो हिन्दू सिख बन रहे हैं उनका कहना है कि साधन संपन्न हिन्दू उनके साथ भेदभाव करते थे। उन्हें अपने बर्तनों में पानी तक नहीं पीने देते थे, लेकिन उनके सिख बन जाने के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। पाकिस्तासन में “सिखों को सरदार कहा जाता है जबकि हिंदुओं में हम साधारण लोग होते थे।” उन्हें अब पाकिस्तानी पूरा सम्मान देते हैं। पाकिस्तान के ननकाना स्थित गुरुद्धारे में विदेशों खासतौर से लंदन, फ्रांस, अमरीका और दूसरे देशों से आने वाले सिख समुदाय से जो संगत और प्यार मिलता है, उसकी वजह से पाकिस्तान के तमाम हिन्दू अब तेजी से सिख धर्म अपना लेते हैं।” पाकिस्तानी मुसलमानों को इससे कोई एतराज नहीं साथ ही जो सिख बन रहे हैं उनको अपने साथ बराबर का दर्जा भी देते हैं।
बदल रहे हैं तेजी से हालात
पाकिस्तान के कई हिन्दू परिवारों का जा सिख धर्म में कन्वर्ट हो चुके हैं, का मानना है कि सिखों की मजबूत संगठनात्मक संरचना उन्हें समाज में बेहतर सुरक्षा और सम्मान दिलाने में मददगार साबित होती है।कराची में सिखों खासतौर से गुरुद्धारों को लेकर तेजी से हालात बदल रहे हैं। कराची शहर के बीचों-बीच आरामबाग गुरुद्वारा 24 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फिर से खोल दिया गया है। इस गुरुद्वारे को लगाकर पाकिस्तान बनने से पहले कराची शहर में आधा दर्जन के करीब गुरुद्वारे मौजूद थे, लेकिन बंटवारे के बाद सिखों के बड़ी तादाद में भारत चले जाने की वजह से ये वीरान हो गए या फिर लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। सिखों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि पहले ये सभी हिन्दू हुआ करते थे। सिंध में हिंदू समुदाय की बड़ी आबादी गुरु नानक की अनुयायी है। यहां उन्हें नानक पंथी कहा जाता है। अक्सर मंदिरों में गुरुग्रंथ साहिब मौजूद होती है लेकिन अब सिख समुदाय अलग गुरुद्वारे बना रही है, जहां और कोई पूजा नहीं होती।


