ऋषभ एकाडेमी प्रबंध समिति के सचिव डा. संजय जैन की तहरीर पर भयभीत कर रंगदारी का मुकदमा थाना सदर बाजार पुलिस ने किया था दर्ज
मेरठ। भयभीत कर रंगदारी के तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने वाली थाना सदर बाजार पुलिस के द्वारा खुद दर्ज की गई एफआईआर पर एफआर काे लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। शिकायत करने वाले छावनी के वेस्ट एंड रोड मंदिर मार्ग स्थित ऋषभ एकाडेमी की प्रबंध समिति के सचिव डा. संजय जैन ने जिनकी तहरीर पर शरद जैन और प्रेम शंकर नाम के शख्स पर सदर बाजार पुलिस ने लंबी जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया था, फिर कपितय बताए जा रहे कारणों से उस पर एफआई यानि फाइनल रिपोर्ट लगाए जाने की जानकारी मिलने पर शिकायतकर्ता डा. संजय जैन खुद हैरान है और इस एफआर को उन्होंने अदालत में चुनाैती देने की बात कही है। बकौल डा. संजय जैन यह बात समझ से परे है कि तमाम ठोस सूबत और गवाह होने के बावजूद इस गंभीर मामले में कथित निर्देशानुसार थाना सदर बाजार के इस मामले की जांच अधिकारी ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जबकि तकनीकि आधार पर इस मामले में फाइनल रिपोर्ट का कोई आधार नहीं बनता। जिस प्रकार से एफआर लगायी गयी है उससे आशंका है कि पहले से तय एक स्क्रिप्ट के तहत फाइनल रिपोर्ट लगायी गयी है।
कहा दफन कर दिए वो सबूत जो दिए
जांच पर आंच इसलिए है क्योंकि शिकायत करने वाले संजय जैन खुद सबूत लेकर पुलिस के पास पहुंचे। वो बताते हैं कि उनसे सबूत तो लिए गए लेकिन वो सबूत जांच का हिस्सा नहीं बनाए गए। होना तो यह चाहिए था कि जो भी ठोस साक्ष्य थाना सदर बाजार के जांच अधिकारी को सौंपे गए थे वो जांच रिपोर्ट में मसलन लिखा पढ़ी में आने चाहिए थे। बयान तो दूर जो साक्ष्य और ठोस सबूत उनसे लिए गए वो तक लिखा पढ़ी में शामिल नहीं किए गए है। ऐसा लगता है कि मानों पहले से तय कर लिया गया था कि अभियुक्तों को क्लीनचिट देनी है। जांच को तो क्लीनचिट देने का जरिया बनाया गया है। डा. संजय जैन सख्त लहज में बताते हैं कि जांच एक तरफा है। अभियुक्तों के इशारे पर और उनको लाभ पहुंचाने के इरादे से कर इसमें फाइनल रिपोर्ट लगायी गयी है, लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे। इस एफआर और थाना सदर बाजार के जांच अधिकारी दोनों को अदालत में चैलेंज किया जाएगा। इसकी सभी तैयारी कर ली गयी हैं। यह पूरा मामला विशुद्ध रूप से भयभीत कर रंगदारी वसूलने का है। तमाम ठोस साक्ष्य मौजूद हैं, जिनकी थाना सदर बाजार पुलिस ने पूरी तरह से अभियुक्तों को लाभ पहुंचने के लिए अनदेखी की है।
सवाल जिनके उत्तर नहीं मिले
डा. संजय जैन की तहरीर पर दर्ज एफआईआर और फिर उस पर कपितय कारणों से एफआर लगाए जाने पर जो सवाल खड़े हो रह हैं उनके उत्तर इस केस में वादी का कानूनी हक भी है। वो बताते हैं कि कथित तौर पर निर्देशानुसार एफआर लगाने की जल्दबाजी में उन तमाम ठोस सबूतो की भी अनदेखी कर दी गयी है जो इस मामले की एफआईआर का आधार बने थे। मसलन भयभीत कर ऑन लाइन पैसों का ट्रांसफर, कथित अभियुक्तों की आपस में बातचीत की कॉल डिटेल, यह बातचीत ऐसा नहीं कि केवल एक दिन ना हुई है। मोबाइल की कॉल डिटेल यह बात चींख-चींख कर कह रही है कि कथित अभियुक्तों में मोबाइल पर लगातार संपर्क बना हुआ था। केवल नामजद अभियुक्त ही नहीं इस पूरे मामले के जो मास्टर माइंड सदर बाजार के एक ज्वैलर्स है उनका भी अभियुक्तों से मोबाइल पर लगातार संपर्क बना हुआ था। निर्देशानुसार एफआर लगाने वाले थाना सदर बाजार के जांच अधिकारी इस साक्ष्य को कैसे अनदेखा का सकते हैं।
बयान दर्ज कराने को करते रह गए इंतजार
इस पूरे केस में तमाम वो लोग थे जो बयान दर्ज कराना चाहते थे वो इसलिए कि जो कुछ कथित रूप से योजनाबद्ध तरीके से मीडिया की मार्फत सोसाइटी खासतौर से ऋषभ में पढ़ने वाले बच्चो व उनके अभिभावकों तथा स्टाफ के समक्ष परोसा गया, उससे वो सभी भयभीत थे। ना जाने कब क्या हो जाए इस आशंका से बुरी तरह से डरे हुए थे क्योंकि आमतौर पर जो बात मीडिया की मार्फत आती है उस पर सहज यकीनद कर लिया जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ बताया गया है। इसी वजह से ऋषभ में पढ़ने वाले बच्चे, उनके अभिभावक और स्टाफ जांच के दौरान अपने बयान दर्ज कराना चाहता था लेकिन जांच अधिकारी ने किस के निर्देशानुसार उन्हें मौकानहीं दिया यह तो जांच अधिकारी ही स्पष्ट कर सकते हैं।
DIOS-CBSE-DEO से क्यों नहीं ली गयी जानकारी
ऋषभ को लेकर जो कुछ भी न्यूज पेपर की मार्फत पराेसा गया उसके बाद होना तो यह चाहिए था कि पुलिस के जांच अधिकारी जो बातच प्रकाशित की गयी उनको लेकर DIOS-CBSE-DEO से जानकारी लेते और उस जानकारी को जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाता। मसलन स्कूल का यदि अवैध संचालन है और लूट की खुली छूट दी गयी है तो फिर DIOS-CBSE के अफसर क्या कर रहे हैं। इसके अलावा यदि अवैध निर्माण है तो फिर छावनी के रक्षा संपदा अधिकारी ने क्यों नहीं कार्रवाई की। ऐसर एक दो नहीं अनगिनत बातें और सवाल हैं जिनकी अनदेखी कर दिए जाने से पुलिस की जांच पर आंच आ रही है। दरअसल हुआ यह कि जो कुछ भी न्यूज पेपर की मार्फत परोसा गया वो तथ्यों पर आधारित था ही नहीं। इसके बावजूद निर्देशानुसार फाइनल रिपोर्ट का लग जाना खुद को अदालती मुसीबत में झोंक देने के मानिंद है। वहीं दूसरी ओर ऋषभ के सचिव डा. संजय जैन का कहना है कि सत्य को सामने लाए बगैर वह शांत होने वाले नहीं।


