इजरायल की अधेड़ महिला अफसर कैदियों के साथ यौन हिंसा में ज्यादा निर्दयी, कैदियों पर छोड़ दिए जाते कुत्ते
नई दिल्ली। इजरायली जेल से रिहा हुए एक पूर्व कैदी ने बताया कि पूर्व कैदी ने बताया कि कैदियों के हाथ-पैर बांधकर उन्हें पेट के बल लिटा दिया जाता था। इसके बाद कुत्तों को उनके ऊपर चलने का आदेश दिया जाता था। एक अन्य कैदी ने बताया कि इजरायल की अधेड़ महिला अफसर कैदियों के साथ यौन हिंसा में ज्यादा निर्दयी होती हैं। तगड़े कुत्ते लाकर कैदियों के हाथ पांव बांधकर कुत्तों को उनके साथ सैक्स कराया जाता है। और भी कई आरोप इजरायली जेल में बंद कैदियों के साथ की जाने वाली हिंसा को लेकर लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों में सामूहिक दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, कुत्तों के इस्तेमाल और लगातार शारीरिक प्रताड़ना जैसी बातें शामिल हैं।
बेहद डरा देने वाली यातनाएं
आरोप है कि इजरायली जेलों में कैदियों के साथ रूह काे कंपा देने वाली यातनाएं होती हैं। रिपोर्ट की मानें तो एक कैदी ने बताया इजरायली सैनिकों ने “पहले उन्होंने हमारे हाथों में सामने की ओर हथकड़ी लगाई। जब बलात्कार शुरू हुआ, तो उन्होंने हमारे हाथों को हमारी पीठ के पीछे कर दिया, हमारे कपड़े उतार दिए और हमें फर्श पर फेंक दिया। ”“हम पर कुत्ते छोड़ दिए गए और उन्होंने बेरहमी से हम पर हमला किया। उनमें से एक कुत्ता बहुत बड़ा था। कुछ सैनिकों ने हमले के दौरान यौन वस्तुओं का भी इस्तेमाल किया।”
यूएन ने किया ब्लैकलिस्ट
इजरायली जेलों में फिलिस्तीनी बंदियों के साथ गंभीर यौन हिंसा, बलात्कार और प्रताड़ना के आरोपों के चलते संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार इजरायल को संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा करने वाली ताकतों की ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में शामिल किया हैl UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में इजरायली बलों द्वारा यौन हिंसा के कई मामलों की पुष्टि की गई हैl इसके विरोध में इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के कार्यालय से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैंl
कैदियों द्वारा लगाए गए आरोप
अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों, ह्यूमन राइट्स वॉच, और अल-जज़ीरा की डॉक्यूमेंट्रीज़ में रिहा हुए कैदियों की गवाही शामिल की गई हैl इनके अनुसार, कैदियों को जबरन निर्वस्त्र (strip) किया गया, प्रताड़ना के दौरान यौन अंगों पर चोटें पहुंचाई गईं,और डरावनें हथकंडों के रूप में कुत्तों का इस्तेमाल किया।
इजरायल का रुख
इजरायली अधिकारियों और सेना ने इन आरोपों को निराधार बताकर सिरे से खारिज कर दिया हैl यद्यपि पूर्व में यौन उत्पीड़न के कुछ मामलों में सैनिकों की गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ऐसे मामलों में न्याय प्रणाली पर्याप्त कार्रवाई नहीं करती है और दोषियों को संरक्षण मिलता हैl


