देश में बेरोजगारी और महंगाई से मीडिल क्लास व मीडिल क्लास पुअर में अधिक नाराजगी, राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व से डेमेज कंट्रोल का प्रयास
नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई, विशेषकर पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल ने आम जनता की क्रय शक्ति को प्रभावित किया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में भाजपा के ग्राफ और जनाधार पर सीधा असर पड़ रहा है। इससे भाजपा का थिक टैंक बेखबर नहीं। माना जा रहा है कि इसी नाराजी से होने वाले डेमेज को कंट्राेल के करने के लिए आने वाले दिनों में हिन्दुत्व व राष्ट्रवाद का तड़का दिया जाएगा ताकि मीडिल क्लास और पुअर मीडिल क्लास केवल गुजरा भर करने को देश भक्ति समझने लगें।
मिडिक क्लास में जबरदस्त नाराजगी
महंगाई और बेरोजगारी के चलते पूरे देश में भाजपा के खिलाफ मीडिल क्लास और पुअर मिडिल क्लास में जबरदस्त नाराजगी है। इस नाराजगी में छोटे और मझोले व्यापारी वर्ग भी शामिल किए जा सकते हैं। बढ़ती महंगाई ने आम जनता और विशेष रूप से मध्यम वर्ग व गरीबों की जेब पर भारी दबाव डाला है, जिससे भाजपा के खिलाफ राजनीतिक असंतोष जरूर पनपा है। हालाँकि, चुनावी आंकड़ों और से पता चलता है कि इसका असर पार्टी की लोकप्रियता या वोट शेयर पर कोई सीधा या बड़ा नकारात्मक नहीं पड़ा है। लेकिन ये आंकड़े पश्चिम बंगाल विधानसभ समेत पांच राज्योंं के विधानसभा चुनाव से पहले के हैं।
हिन्दुत्व से काट का प्रयास
महंगाई और देश में बेरोजगारी के मुद्दे की काट के लिए हिन्दुत्व का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन इस बार यह नाकाफी नजर आ रहा है। बढ़ती महंगाई ने आम जनता और विशेष रूप से मध्यम वर्ग व गरीबों की जेब पर भारी दबाव डाला है, जिससे भाजपा के खिलाफ कुछ राजनीतिक असंतोष जरूर पनपा है। कुल मिलाकर, महंगाई भाजपा के लिए निश्चित रूप से एक बड़ी चुनौती और चिंता का विषय रही है, लेकिन यह पार्टी की लोकप्रियता में भारी गिरावट का कारण नहीं बनी है । उसकी कुछ दूसरी वजह भी हो सकती हैं।
मुफ्त राशन से डेमेज कंट्रोल
महंगाई और बेरोजगारी से पनपी नाराजी से हुए नुकसान की भरपाई देश की 80 लाख आबादी को मुफ्त राशन देकर करने का प्रयास है। विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई से प्रभावित गरीब मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ बना हुआ है । इसके पीछे मुफ्त राशन, आवास योजना, और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी सरकारी योजनाओं (welfare schemes) की बड़ी भूमिका है, जो महंगाई की मार को कम करने में मददगार साबित होती हैं । राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता और हिंदुत्व या राष्ट्रवाद जैसे अन्य भावनात्मक व सामाजिक मुद्दे, आर्थिक परेशानियों (जैसे महंगाई और बेरोजगारी) पर भारी पड़ते हैं ।


