शहर तो दूर की बात अपना मोहल्ला तक नहीं..

Shekhar Sharma
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मेरठ को इंदौर बनाने का दावा और डेढ़ साल से खुदा पड़ा है बेगमबाग, वाशिंदे दे रहे महापौर का नाम लेकर उलाहना

मेरठ। मेरठ काे इंदौर बना देने का दावा करने वालों से अपना मोहल्ला तक नहीं संभल रहा है। नगर निगम बेगमबाग तिलक रोड इलाका शहर के उन इलाकों में शुमार किया जाता है जो घनी आबादी वाले हैं और पुराने हैं। शास्त्रीनगर, लोहिया नगर, सेंट्रल मार्केट, जाग्रति विहार, बाईपास, गंगानगर, डिफैंस कालोनी सरीखे मेरठ के सैकड़ों ऐसे इलाके हैं जिनका उदय बेगमबाग के बाद हुआ और उनकी स्थिति वहां के लोगों को सुविधाएं बेगमबाग से बहुत बेहतर हैं। वहां चौड़ी सड़कों हैं और स्ट्रीट लाइटें भी जलती हैं। इसके इतर बेगमबाग और तिलक रोड के इलाके की यदि बात करें तो चिराग तले अंधेरा है। वो इसलिए क्योंकि तिलक रोड का इलाका मेयर का मोहल्ला कहलाता है। यहां इनका पुश्तैनी मकान आज भी है। इसके अलावा चिराग तले अंधेरा इसलिए भी क्योंकि इलाके ने भाजपा को निर्विरोध पार्षद दिया। यह इलाका नगर निगम के वार्ड 52 में शुमार होता है।

दो साल है खुदा पड़ा

बेगमबाग/तिलक रोड इस इलाके की यदि बात करें तो बेगमबाग निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट पुनीत शर्मा ने बताया कि कभी किसी वजह से तो कभी किसी वजह से पिछले दो सालों से पूरा इलाका खुदा हुआ है।उन्होंने बताया कि सबसे पहले करीब दो साल पहले इस इलाके में सीवर लाइन को लेकर खुदाई शुरू करायी गयी। जब सीवर लाइन के नाम पर खुदाई करायी गयी तो पूरा बेगमबाग का इलाका खुदवा दिया गया मसलन जहां से सीवर लाइन होकर गुजरी। ऐसा नहीं कि ठेकेदार ने यह काम तेजी से कराया हो और जल्दीकाम निपटा दिया गया हो। ऐसा बिलकुल नहीं हुआ। इस तरह के सरकारी कामों में जितनी देरी लगती है उससे भी ज्यादा देरी बेगमबाग, तिलक रोड और इससे सटे दूसरे इलाकों में सीवर लाइन डालने के नाम पर की गयी। हालत यह हो गयी थी कि पैदल निकलना भी दुश्वार होता था। आज कल आमतौर पर सभी घरों में कार है। अंदाजा लगाएं कि सड़क के बीचों बीच खुदाई करा दी गयी हो तो फिर कार तो छोड़िएं साहब बाइक भी गली से निकालना मुश्किल था। गाड़ियां इधर उधर खड़ी करनी पड़ती थी।

बार-बार खुदाई

तिलक रोड को लेकर लोगों ने बताया कि यह तीसरी बार खोदी गयी है। पहले पानी की पाईप लाइन डालने के लिए उसके बाद टाइल बिछवाने के लिए और अब सीवर लाइन के नाम पर खुदाई करा गई। लोगों की यह भी शिकायत है कि जो सीवर लाइन डाली गयी है वह भी इस इलाके की आबादी के अनुपात में नाकाफी है। उनका कहना है कि कम से कम बीस इंच की लाइन डाली जानी चाहिए थी, लेकिन डाली गयी है केवल पांच या छह इंच की जो बहुत ज्यादा कम है। लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में जब पानी का प्रेशर अधिक होता है तब इतनी छोटी पाइप लाइन पानी का प्रेशर वहन नहीं कर सकेगी और यहां जबरदस्त जलभराव होगा। हालत इतनी ज्यादा खराब होगी कि पानी घरों में भर जाएगा।

कब होगी रिपेयरिंग

मेरठ का इंदौर बना देने का दावा करने वालों से तिलक रोड के वाशिंदे जानना चाहते हैं कि सीवर लाइन डालने का काम भी एक अरसे पहले पूरा कर लिया गया, लेकिन आज तक भी तिलक रोड बदहाल है। सीवर लाइन डालने के लिए जो खुदाई की गयी थी उसको दोबारा पहले जैसा करने के लिए यहां नए सिरे से रोड बने या फिर टाइल जगवायी जांए। क्योंकि जिस हाल में इस वक्त तिलक रोड है उसके चलते यदि दो दिन भी झमाझम बारिश हो गयी तो यहां कितना बुरा हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

गुजरता है भारी यातायात

लोगाें ने बताया कि तिलक रोड को इस इलाका का बाईपास माना जा सकता है। यहां दिन भर गाड़ियां दौड़ती हैं। बेगमपुल या आबूलेन से जिन्हें भी कचहरी की ओर जाना होता है वो बजाए जीआइसी के सामने से होकर जाने के तिलक रोड से होकर निकलते हैं। रोड क्षतिग्रस्त व खराब होने की वजह से यहां दिन भर जाम लगा रहता है। इस इलाके में रहने वाले चाहते हैं कि जितना जल्दी हो सके यहां का रास्ता दुरूस्त किया जाना चाहिए।

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