


सीजेपी नेताओं ने भरी हुंकार, बोले गांधी जी आंदोलन से पहले अंग्रेजों से परमिशन लेने नहीं जाते थे
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल प्रदर्शन का ऐलान किया है। सीजेपी नेतृत्व और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के घटक दलों (जैसे लेफ्ट व युवा संगठनों) का दावा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत विरोध जताने के लिए पुलिस की अनुमति की आवश्यकता नहीं है और देश भर से लाखों युवा इस मार्च में शामिल होने दिल्ली पहुंच रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है और पूरी राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं।
पुलिस से परमिशन की नहीं जरूरत
सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा है कि उन्हें दिल्ली पुलिस की परमिशन की जरूरत नहीं है। यह कानूनी अधिकार उन्हें संविधान ने दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्वक है। सीजेपी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जंतर-मंतर एक घोषित विरोध स्थल है। उन्होंने 7 अक्टूबर को पुलिस को सिर्फ एक ‘सूचना पत्र’ (Intimation Letter) सौंपा था, न कि अनुमति की अर्जी, क्योंकि उनके मुताबिक शांतिपूर्ण ढंग से नागरिक अधिकार और असंतोष जताने के लिए प्रशासनिक परमिशन अनिवार्य नहीं होनी चाहिए। कानून विदों का मानना है कि प्रोटेस्ट के लिए परमिशन की जरूरत नहीं है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और सह-संयोजक सौरव दास के अनुसार, देश के युवाओं का यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। सीजेपी का आरोप है कि एसआईआर (SIR) अभियान के नाम पर वोटर लिस्ट से लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
देश भर से युवाओं के जत्थे दिल्ली रवाना
‘इंडिया’ गठबंधन से जुड़े विभिन्न छात्र संगठनों, लेफ्ट विंग और किसान नेता राकेश टिकैत ने भी इस प्रदर्शन को अपना खुला समर्थन दिया है। पुणे, राजस्थान और अन्य राज्यों से युवाओं के जत्थे दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। सीजेपी ने एलान किया है कि यदि पुलिस उन्हें रास्ते में रोकेगी, तो ‘जहां रोकेंगे, वहीं उनका जंतर-मंतर बन जाएगा’ और यह पूरी तरह अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन होगा।
दिल्ली में ये किया
6,000 जवानों का पहरा: दिल्ली में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 200 से अधिक कंपनियों (लगभग 20,000 अतिरिक्त जवान) को तैनात किया गया है, जो छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों से बुलाए गए हैं। नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू कर दी गई है। इसके तहत किसी भी तरह का गैर-कानूनी जमावड़ा प्रतिबंधित है। दिल्ली पुलिस के निर्देश पर 57 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एक्जिट गेट बंद करने और ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी घटाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा रेलवे ने भी ट्रैफिक जाम से बचने के लिए नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच आने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पूरी तरह ‘फ्री हैंड’ देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आंदोलन में शामिल होने वाले अधिकतर युवा छात्र हैं, इसलिए उनके और उनके परिवारों के भविष्य को देखते हुए उन्हें जबरन लंबी अदालती प्रक्रियाओं में नहीं उलझाया जाना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि यह राहत गंभीर अपराधियों या दंगाइयों पर लागू नहीं होगी। विपक्ष और छात्र संगठनों का कहना है कि वे इस प्रशासनिक नाकेबंदी और गिरफ्तारियों (जैसे राजस्थान में सीजेपी नेताओं की डिटेंशन) के बावजूद दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च सुनिश्चित करेंगे। अब पूरे देश की नजरें 10 तारीख को दिल्ली की सड़कों पर होने वाले इस बड़े सियासी टकराव पर टिकी हैं।


