मछलियां भी इस रास्ते से ईरानी रेवल्यूशनरी गार्ड की मर्जी के बगैर नहीं हैं गुजर रहीं
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही कुछ भी दावा करें, लेकिन उनके दावो के इतर स्ट्रेट हाेर्मूज से होकर लहरें भी ईरानी रेेवल्यूशनरी गार्ड की मर्जी के बरखिलाफ होकर नहीं गुजर सकतीं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान की एक शर्त यह है कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगले दो हफ्तों में आवागमन केवल ईरानी सेना के “समन्वय” से ही संभव होगा। अमेरिका में अपनी तेजी से गिरती हुई लोकप्रियता से परेशान डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट होर्मूज पर ईरानी नियंत्रण की शर्त पर राजी हो सकते हैं।
पाकिस्तान में वार्ता के बाद साफ होगी तस्वीर
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बैठक होने जा रही है। इस बैठक का सभी को बेेसब्री से इंतजार है। इस बैठक के बाद तय होगा कि स्ट्रेट हाेर्मूज पर किस का क्या रूख रहेगा। अभी भी यह रास्ता ईरानी रेवल्यूशनरी गार्ड की निगरानी में है। उनकी मर्जी के बगैर यहां से मछलियां भी होकर नहीं गुजर रही हैं।
इजरायल की चिंता
इजरायल जिसको इस सारे फसाद की जड़ बताया जा रहा है, को “एक खामोश लेकिन स्पष्ट चिंता है कि राष्ट्रपति ट्रम्प, त्वरित राजनीतिक जीत के लिए उत्सुक होकर, खाड़ी की वास्तविकताओं पर दिखावे को प्राथमिकता देते हुए, एक नाजुक युद्धविराम के बदले में जलडमरूमध्य पर ईरान के कुछ प्रभाव को बर्दाश्त कर सकते हैं।”
वहीं दूसरी ओर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के छह देशों ने लगातार बयान जारी कर ईरान के लगभग दैनिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद चिंता व्यक्त की। अलग-अलग शब्दों का प्रयोग करते हुए, उन्होंने युद्धविराम का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रेट होर्मुज को फिर से खोला जाना चाहिए और किसी भी समझौते का परिणाम स्थायी और दीर्घकालिक व्यवस्था होना चाहिए।


