नेतन्याहू के बचाव में सफाई देनी पड़ रही डोनाल्ड ट्रंप को, बता रहे युद्ध में इजरायल की वजह से नहीं अमेरिका
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दुनिया ही नहीं अमेरिकनों को भी अब सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा रहा है। इस बार मामला इजरायल के पीएम नेतन्याहू से जुड़ा है। आरोप है कि नेतन्याहू ने अमेरिका के कई पहले के राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ उकसाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी नेतन्याहू के झांसे में नहीं आया। लेकिन ट्रंप आ गए। यह मामला पूरी दुनिया और खासतौर से अमेरिकनों में नाराजगी की वजह बना हुआ है। अब ट्रंप सफाई दे रहे हैं कि जो धारणा बना ली गयी है वैसा कुछ भी नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस बात से इनकार किया है कि इजरायल ने उन्हें ईरान के साथ युद्ध में घसीटा है, क्योंकि उन्हें इस संघर्ष को लेकर बढ़ती आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उनके अपने समर्थकों का एक वर्ग भी शामिल है।
यह बोले डोनाल्ड ट्रंप
“इजराइल ने मुझे ईरान के साथ युद्ध के लिए कभी राजी नहीं किया, 7 अक्टूबर के नतीजों ने मेरी इस आजीवन राय को और मजबूत कर दिया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता,” ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा।
ट्रंप के खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड का ईरान पर परमाणु हथियार से ना
ईरान से लड़ाई को लेकर डोनाल्ड ट्रप को कई चुनौतियां फेस करनी पड़ी रही हैं। ट्रंप के खुफिया प्रमुख कह चुके हैं कि ईरान के पास कोई परमाणु कार्यक्रम नहीं है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों में ईरान का प्रत्यक्ष संबंध साबित करने वाला कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है। ट्रंप की खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने भी मार्च में कांग्रेस के सामने गवाही देते हुए कहा था कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है।
ट्रंप का दावा और तुलसी गैबार्ड के बयान
ईरान के पास परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप के दावे और तुलसी गैबार्ड की गवाही ने अमेरिकनों की नजर में ट्रंप को बतौर युद्ध विलेन के तौर पर पेश किया है। ईरान पर युद्ध से पहले के आठ महीनों में, ट्रम्प दावा कर रहे थे कि जून में अमेरिकी हवाई हमलों ने उसके परमाणु कार्यक्रम को “नष्ट” कर दिया था। ट्रम्प के कई आलोचकों ने तर्क दिया है कि ईरान ने अमेरिका के लिए कोई तत्काल खतरा पैदा नहीं किया था और यह युद्ध केवल अमेरिकियों की सुरक्षा और समृद्धि की कीमत पर इजरायल को खुश करने के लिए छेड़ा गया है।
अमेरिकनों पर महंगाई की मार
28 फरवरी से जब से ईरान के साथ लड़ाई मोल ली गयी है अमेरिकनों पर बार-बार महंगाई का चाबुक बरस रहा है। ईधर की कीमतें आसामन पर हैं। देश में मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम लागू होने के एक सप्ताह से अधिक समय बाद भी, 1 गैलन (3.8 लीटर) पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर से अधिक बनी हुई है, जबकि युद्ध से पहले यह 3 डॉलर से कम थी। अब जब ईरान ने अमेरिका से किसी भी प्रकार की बातचीत से इंकार कर दिया है तो हालात अधिक खराब हो गए हैं।


