दिन भर लगा रहता है जाम, लोग होते हैं हलकान, इसके बाद भी नींद में कैंट बोर्ड के अफसर
सदर शिव चौक स्थित चस्का फूड पर अतिक्रमण के आरोप, किराया आवंटन निरस्त करने की मांग़
सीईओ और राजश्व विभाग की मिलिभगत से खोखानुमा दुकान का एरिया बढ़ाकर सार्वजनिक रास्ता बाधित कर किया गया अतिक्रमण पर कब होगी कार्रवाई
मेरठ। छावनी वेस्ट एंड रोड शिव चौक के समीप बंगला नंबर 210-बी के एक कोने पर खोखा नुमा जगह में संचालित किया गया चस्का फूड के संचालकों ने अब रेस्टोरेंट की तर्ज पर हाथ-पांव फैला दिए हैं। आसपास की जमीन पर कब्जे का आरोप है। यहां दिन भर जाम सरीखे हालात रहते हैं। छावनी परिषद कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर बैठे बोर्ड अफसरों को चस्का फूड का अवैध व तेजी से फैल रहा कब्जा नजर नहीं आ रहा है। वहीं दूसरी ओर लोगों का कहना है कि चस्का फूड काे सेटिंग गेटिंग के चलते ही मनमानी करने की छूट छावनी परिषद के अफसरेां ने दी है। आरोप है कि “चस्का फूड” नाम से संचालित रेस्टोरेंट द्वारा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया जा रहा है।
लोगों ने बताया कि यहां कोर्ट के आदेश पर की गयी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद इसी बंगले में एक कौने पर खोखानुमा जगह आवंटित की गयी थी जो होटल रेस्टोमेंट की शक्ल लेती जा रही है। संचालक गिरीश सोती ने आसपास का काफी सरकारी क्षेत्र एवं सार्वजनिक सड़क तक घेर लिया है। आरोप है कि दुकान के बाहर अवैध रूप से टीन शेड, बैठने की व्यवस्था तथा खाना बनाने का स्थायी ढांचा तैयार कर लिया गया है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया गया कि उक्त स्थान पर नान, रोटी, सब्जी, दाल सहित अन्य खाद्य सामग्री का कारोबार बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
कहां है पॉल्यूशन एनओसी
साथ ही लकड़ी और कोयले से चलने वाला तंदूर लगाए जाने से धुआं एवं प्रदूषण फैल रहा है, और सड़क और काउंटर, टेबल कुर्सी लगाकर अतिक्रमण कर और बढ़े बढ़े होडिंग दुकान के आगे नाम रखने के लिए लोहे के पाइप लगाये जा रहे है जो बिना अनुमति के अवैध कार्य है अपने निजी फायदे के लिए लोगों को आम नागरिकों को सार्वजनिक रास्ता बांधित कर हानि पहुंचाई जा रही है। जिससे आसपास के व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों में नाराजगी है। कुछ दूरी पर ही पांच छ बड़े-बड़े स्कूल है जहां लगभग 20 से 25000 बच्चे पढ़ने आते हैं और आस पास अतिक्रमण के चलते यहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है और सुबह और दोपहर स्कूल के समय शिवचौक पर अतिक्रमण के बच्चे स्कूल जाने मे लेट हो जाते है आए दिन चस्का फ़ूड वालों को राहगीरो से काउंटर अतिक्रमण हटाने के मामले को लकर वाद विवाद होता रहता है और कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो रहे अतिक्रमण से हो सकती है क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब रेस्टोरेंट संचालक द्वारा उस हिस्से में भी कब्जा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है जहां पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 मे वेस्टन एंड रोड, सदर
बाजार शिवचौक स्थित बंगला नंबर 210-बी स्थित निर्माण को कैंट बोर्ड मेरठ की टीम ने आर आर मॉल को ध्वस्त किया गया था। गौरतलब है कि ध्वस्तीकरण के दौरान मलबे में दबकर चार लोगों की मौत हो गई थी, उक्त हादसे के संबंध में मेरठ कैंट के सदर बाजार थाना में हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। एफआईआर में तत्कालीन कैंट बोर्ड सीईओ राजीव श्रीवास्तव, सीईई अनुज सिंह, सहायक अभियंता पीयूष गौतम, अवर अभियंता अवधेश यादव, योगेश यादव, अरविंद गुप्ता सहित अन्य अज्ञात कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए थे। वही हाईकोर्ट ने रक्षा सचिव रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को कैंटबोर्ड मेरठ व अन्य दोषी कर्मचारी अधिकारी के खिलाफ जो बड़े पैमाने पर अतिक्रमण करवाने में शामिल है उनके खिलाफ भी कार्यवाही करने के आदेश दिए थे।
जहां कार्रवाई वहीं पर कब्जा
अब स्थानीय लोगों का आरोप है कि उसी विवादित स्थल के बगला 210 बी के उसी हिस्से मे उसके आसपास भी दोबारा अतिक्रमण बढ़ना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। लोगों का कहना है कि कैंट बोर्ड के राजस्व विभाग एवं संबंधित कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण अवैध कब्जा नहीं हटाया जा रहा है। क़्की राजश्व विभाग के कर्मचारियों ने मोके पर आए लेकिन चस्का फ़ूड के संचालनकर्ता से सेटिंग गेटिंग करके बिना अतिक्रमण हो हटाए बिना ही वापस चले गए जबकि पुरा का पुरा काउंटर, स्टूल, कुर्सी और खाना बनाने का सामान सड़क पर ही रोज ही रखा रहता है जिससे यातायात प्रभावित होता है और शिवचौक पर अक्सर जाम रहता है आम जनता परेशान रहती है और कैंट बोर्ड मेरठ सीईओ जाकिर हुसैन और राजश्व विभाग के हैड भी कोई कार्यवाही अतिक्रमण हटाने के लिए नहीं कर रहे
इस बारे मे क्षेत्रवासियों सहित व्यापारियों ने भी मांग की है कि “चस्का फूड” को दिया गया किराया आवंटन तत्काल निरस्त किया जाए तथा सार्वजनिक सड़क और सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाया जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह छावनी परिषद प्रशासन की होगी।


