तेइस से रिकबरी के बजाए प्रमोशन की तैयारी

Shekhar Sharma
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नगर निगम के भर्ती घोटाले में तेइस कर्मचारियों से हाईकोर्ट ने दिए हैं रिकबरी के आदेश, सीबीसीआईडी आगरा ने दर्ज करायी हुई है थाना देहलीगेट में एफआईआर

मेरठ। नगर निगम कथित भर्ती घोटाले में जिन तेइस कर्मचारियों से हाईकोर्ट के आदेश पर रिकबरी कर उन्हें सेवा मुक्त किया जाना था उन्हें प्रमोशन दिए जाने की तैयारी कर ली गयी है। इसके लिए बाकायदा एक आदेश जारी कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज चिंडालिया इस मामले को लेकर नगरायुक्त सौरभ गंगवार और सूबे के सीएम योगी को पत्र लिखकर कथितरूप से तेइस कर्मचारियों के प्रमोशन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यहां उल्लेखनीय है कि इन तेइस कर्मचारियों से रिकबरी के आदेश तत्कालीन प्रमुख सचिव नगर विकास ने मंडलायुक्त मेरठ को दिए थे, यह बात अलग है कि निगम के ही कुछ कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्हों ने इस आश्य के आदेश सक्षम अधिकारी के सामने ही नहीं आने दिए।

यह है पूरा मामला

विगम 12 मई को नगरायुक्त सौरभ गंगवार ने नगर निगम के सभी विभागध्यक्षों को लिखे पत्र में कहा है कि कर्मचारियों की सेवा से सम्बन्धित समस्याओं के निस्तारण हेतु संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र संख्या अन्तर्गत कर्मचारी संघ द्वारा पूर्व संख्या 1014 / आ०लि० – न०आ०
उपर्युक्त विषयक अध्यक्ष / महामंत्री नगर निगम कर्मचारी संघ का सन्दर्भ ग्रहण करें, जिसके प्रेषित 8 सूत्रीय मांग पत्र के क्रम में अधोहस्ताक्षरी द्वारा जारी निर्देश पत्र का उल्लेख करते हुए नगर निगम, मेरठ में कार्यरत अकेन्द्रीयत सेवा संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति हेतु प्रभावी कार्यवाही हेतु अनुस्मारक पत्र प्रस्तुत करते हुए प्रभावी कार्यवाही किये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। अतः उपरोक्त के सम्बन्ध में आपको निर्देशित किया जाता है कि अपने-अपने अनुभाग में कार्यरत अकेन्द्रियत सेवा संवर्ग के समूह ग व घ के कार्मिकों की सूचना अपर नगर आयुक्त / वरिष्ठ प्रभारी कार्मिक को प्राप्त कराया जाना सुनिश्चित करें ।

सीएम से जांच व कार्रवाई की मांग

नगर निगम के तेइस कर्मचारियों के संबंध में निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह ने जो शिकायत की थी उसी को आधार बनाकर आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज चिंडालिया ने सीएम कार्यालय को भेजे गए पत्र में तेइस कर्मचारियों की कथित घोटाले से भर्ती की जांच की मांग करते हुए आरआईजीएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करायी। उन्होंने शिकायत में तेइस कर्मचारियों जिनमें जावेद पुत्र युनुस (ड्राईवर), अमर देव पुत्र राम पाल (लिपिक), महमुद अली पुत्र शमीम उर रहमान (ड्राईवर), मनोज कुमार गोड पुत्र शिव कुमार ( ड्राईवर ), सुनील कुमार सिंह पुत्र सोती सिंह (सुपरवाईजर ), दिनेश कुमार पुत्र रघुबीर सिंह (लिपिक), मौ. परवेज पुत्र मौ. युनुस ( ड्राईवर ), धर्मेन्द्र उर्फ धर्मेश पुत्र पारस नाथ (लिपिक), आलोक शर्मा पुत्र नरेन्द्र शर्मा (कम्प्यूटर आपरेटर ), सुनील शर्मा पुत्र नरेन्द्र शर्मा (कम्पयूटर आपरेटर ) 11- सुनील दत्त शर्मा (कम्पयूटर आपरेटर ), राजकुमार ( पटवारी), रूद्रेश पुत्र नानक चन्द ( पटवारी), मनोज कुमार पुत्र बुद्धप्रकाश (ड्रा. नआ), संजय पुत्र सुरेश (ड्राईवर ), शम्स आरिफ पुत्र अब्दुल हकीम (ड्राईवर ), सतीश कुमार पुत्र निर्मल सिंह (ड्राईवर ), राजेश कुमार पुत्र पारस नाथ (ड्राईवर ), नौशाद अहमद, अनुचर, नकुल वत्स पुत्र योगेन्द्र शर्मा, हरबीर सिंह पुत्र राम कला (लिपिक), शसकेब खान और राजेन्द्र कुमार कोरी ( अर्दली नआ)। इसको लेकर साल 2023 में आईजीआरएस पर भी एक शिकायत की थी। यह शिकायत पंकज चिण्डालिया / संदीप / प्रवीन / अमित एवं समस्त 2215 सफाई कर्मचारी नगर निगम मेरठ की ओर से संयुक्त रूप से की गयी थी।

कायदे कानून ताक पर

पंकज चिंडालिया ने बया कि उक्त नियुक्ति के लिये कोई विज्ञापन भी जारी नहीं किया गया। नियुक्ति के लिये कोई चयन समिति भी नहीं बनायी गयी। नियुक्ति में किसी भी प्रकार का कनिष्ठ व वरिष्ठता का कोई आधार नहीं माना गया। नियुक्ति में कोई किसी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं हुई । नियुक्ति में कोई साक्षातकार भी नहीं हुआ। नियुक्ति में कोई वरिष्ठता सूची भी नहीं बनायी गयी। संविदा कर्मचारियों को स्थाई / विनियमितिकरण करने का कोई नियम नहीं है। उन्होंने बताया कि शासनादेश 6-12-1991 के बाद नियुक्ति नियम विरूद्ध है। ( उच्च न्यायालय ने भी माना )


वर्जन

नगर निगम के पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह का कहना है कि उन्होंने अनेक बार अलग-अलग स्तरों पर इस मामले को उठाया है। जांच करायी। इस मामले में सीबसीआईडी आगरा ने थाना देहलीगेट में सभी तेइस कर्मचारियोंपर एफआईआर दर्ज करायी हुई है। यदि इसमें अब प्रमोशन की तैयारी है तो वह मामले से सीएम को अवगत कराएंगे। आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज चिंडालिया ने बताया कि उन्होंने ठोस साक्ष्य के साथ सीएम योगी कार्यालय को शिकायत भेज दी है।


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