सिपाही की मां की निर्मम हत्या

Shekhar Sharma
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हत्यारे जिस्म से सोने की ज्वैलरी भी ले गए नोंच कर, संभल में तैनात है मृतक का बेटा, पति की हो चुकी है मौत

मेरठ। अब इसको जंगल राज ना कहें तो क्या कहें कि कानून के मुहाफिजों के परिजन भी हिफाजत में नहीं। संभल में तैनात एक सिपाही विपिन की मां की बदमाशों ने निर्मम हत्या कर दी। मृतक के जिस्म से ज्वैलरी भी बदमाश नोंच कर ले गए। इस सनसनी खेज वारदात ने मेरठ में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वारदात परीक्षितगढ़ थाना के रामनगर में अंजाम दी गयी है। रामनगर निवासी फूल समुद्री के पति राम सिंह की पहले ही मौत हो चुकी थी। परिवार में दो बेटे और चार बेटियां हैं। बड़ा बेटा मोनू गांव से 6 किमी दूर परीक्षितगढ़ में ट्रेलर की दुकान चलाता है, जबकि छोटा बेटा विपिन यूपी पुलिस में कांस्टेबल है। वह संभल में तैनात है। चारों बेटियों की शादी हो चुकी है। फूल समुद्री घर में अकेली रहती थीं। जानकारी के मुताबिक मंगलवार शाम करीब 7 बजे फूल समुद्री खेत से काम करके घर लौटी थीं।

घर में पड़ी थी खून से लथपथ लाश

बताया जाता है कि फूल गांव के अन्य महिलाओं के साथ कई बार खेतों पर चली जाती थी। आज सुबह भी उसको खेतों पर जाना था। गांव की शरबती उन्हें खेत पर काम के लिए बुलाने पहुंची। घर के बरामदे में खून पड़ा देखकर उसे शक हुआ। उसने अंदर देखा तो बरामदे के एक कोने में फूल समुद्री का शव खून से लथपथ पड़ा था।

पूरा गांव घर पर जमा

शरवती ने लाश देखकर शोर मचा दिया। कुछ ही पलों में फूल की हत्या की खबर पूरे गांव में जंगल की आग की मानिंद फैल गई। पूरा गांव वहां जमा हो गया। सूचना पर परीक्षितगढ़ थाना प्रभारी सुदीश सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने के बाद आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी।

बेटी ने लगाए गांव वालों पर आरोप

फूल समंदरी की हत्या के बाद परिवार में आक्रोश है। मौके पर पहुंची उनकी बेटी मोनी ने आरोप लगाया कि उसकी मां की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि गांव के ही लोगों ने कराई है। मोनी ने कहा- मां अकेली रहती थीं। जब भी हम यहां आते थे, तो मोहल्ले के कुछ लोग शराब के नशे में उन्हें ताना मारते थे। कहते थे कि बुढ़ापे में इतने सोने के जेवर पहनकर कहां जाओगी, कोई लूटकर मार देगा। जब तक मां के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वह शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दूंगी।

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