सीबीआई ने दर्ज कराया मुकदमा, डॉक्यूमेंट अपलोड करने के मांग थे पैसे
मेरठ/ सीबीआई ने सीजीएसटी के अधीक्षक अधीक्षक संजय मीना और कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को अरेस्ट कर लिया है। उनके खिलाफ मुकदमा भी लिखा दिया गया है। आरोप है कि कंकरखेड़ा निवासी रोहित पाल से उसके डॉक्यूमेंट आपलोड करने की एवज में रिश्वत मांगी गयी। उसी क्रम में सीबीआई की टीम आज सीजीएसटी कार्यायल पहुंची और आरोपियों को अरेस्ट कर ले गयी। जिस शख्स से पैसे वसूले गए उसने ही सीबीआई से की थी। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने छापेमारी करते हुए अधीक्षक और कंप्यूटर ऑपरेटर दोनों को अरेस्ट कर लिया है। सीबीआई ने एक दिन पहले यानि मई को आरोपी अधीक्षक, रेंज-1, मेरठ (उत्तर प्रदेश) के कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ शिकायतकर्ता को जारी कारण बताओ नोटिस रद्द करने के बदले में अधीक्षक की ओर से 6 हजार रुपये की अवैध रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया।
रात में बिछा दिया जाल
इस मामले में लिखा पढ़ी के बाद सीबीआई के अफसरों ने आरोपियों की अरेस्टिंग के लिए बुधवार रात को ही जाल बिछा दिया था। उसके बाद जैसे ही पैसों का लेने देेन किया गया सीबीआई ने कंप्यूटर ऑपरेटर और सीजीएसटी अधीक्षक को रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। शिकायतकर्ता रोहित पाल कंकरखेड़ा का रहने वाला है। रोहित का अपना वेडिंग स्टेडियो है। जिसका रिवलोकेशन होना था। उसी से जुड़ी विधिक प्रक्रिया को उसे पूरा करना था। इसी के कागज अपलोड करने के लिए यश शर्मा जो अधीक्षक संजय मीना का कंप्यूटर ऑपरेटर है उसने 6हजार रुपए की मांग की थी। इसके बाद रोहित ने इसकी शिकायत कर दी थी।
छह हजार रिश्वत मांगी
आरोप है कि इसी दौरान कार्यालय में तैनात कम्प्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा ने मामले के निस्तारण के बदले 6 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने कहा कि वह रिश्वत नहीं देना चाहते। उन्होंने मामले की शिकायत सीबीआई से कर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल मामले में जांच की मांग की गई है। शिकायत के बाद सीबीआई गाजियाबाद की टीम मेरठ पहुंची और आरोपियों को अरेस्ट कर ले गई है। शिकायत के बाद सीबीआई टीम ने पूरे मामले में लगे आरोपों की सावधानीपूर्वक जांच कराई।
प्रथम द़ष्टया दोषी
इस जांच में सीजीएसटी रेंज-1 के अधीक्षक संजय मीना और उनका सहयोगी कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा दोनों ही प्रथम द़ष्टया दोषी मिले हैं। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधनियम 1918 (2018 में संशोधित) की धारा 7ए के अंतर्गत दंडनीय अपराध मानते हुए मुकदमा लिखा गया है। पूरे मामले की जांच सीबीआई एसीबी गाजियाबाद के निरीक्षक ऋषभ राज को दी गई है।
बकौल पीड़ित जब मुझसे पैसे की डिमांड हुई तब इसकी शिकायत सीबीआई गाजियाबाद को की गई थी। इसके बाद सीबीआई ने ही सारा एक्शन लिया है। शिकायत के बाद से ही सीबीआई मामले पर नजर गढ़ाए हुई थी। उन्हीं की ओर से पूरा एक्शन लिया गया है। बुधवार रात भी टीम यहीं सीजीएसटी कार्यालय के आसपास रही। गुरुवार को सीबीआई दोनों को लेकर गई है।
रोहित ने कहा
रोहित ने कहा कि वो बस अपना काम करना चाहते हैं। इससे ज्यादा उन्हें कुछ नहीं चाहिए, न वो कुछ कहना चाहते हैं। बताया कि छापेमारी की पूरी प्रक्रिया के दौरान काफी मानसिक तनाव से गुजरा हूं। अब अपने काम पर फोकस करना चाहता हूं इसलिए कुछ नहीं बताना चाहता। कहा कि सब कुछ विभाग की ओर से हो रहा है इसलिए मुकदमा हुआ या नहीं या क्या होगा ये मैं नहीं बता सकता। मैं परेशान हो रहा था जिसके बाद मैंने शिकायत की जिस पर सीबीआई ने रेड डाली अब आगे मुझे कुछ नहीं कहना है।


