

शास्त्रीनगर के लोगों ने ली राहत की सांस, लोग बोले राहत की मिले गारंटी, दूसरे दिन भी थमे रहे आवास विकास की जेसीबी के पहिए
मेरठ। शास्त्रीनगर में आज दूसरे दिन भी आवास विकास परिषद की जेसीबी के पहिये थमे रहे। जेसीबी की जिस दहाड़ से जिनके मकानों में तोड़फोड़ की जा रही है वो बुरी तरह से घबराए हुए थे उन्होंने आज दूसरे दिन भी किसी प्रकार का ध्वस्तीकरण ना किए जाने से राहत की सांस ली है। हालांकि उनमें डर और दहशत में किसी प्रकार की कोई कमी नजर नहीं आ रही है। बीते मंगलवार को भी आवास विकास की कार्रबाई थमी रही। आज सुबह दूसरे दिन भी लोग संभावित कार्रवाई को लेकर डरे सहमे हुए थे, लेकिन दोपहर के जब दो बजे गए और कोई हरकत नहीं हुई तो उन्होंने राहत की सांस ली। लेकिन जिन्हें नोटिस दिए गए हैं आवास विकास का खौफ उनकी बातचीत में साफ नजर आता है।
कार्रवाई होगी जरूर
दूसरी ओर सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों का यह भी मानना है कि किन्हीं कारणों के चलते दो दिन यदि आवास विकास परिषद ने ध्वस्तीकरण अभियान नहीं चलाया है तो उसको लेकर किसी गलत फहमी में रहने की जरूरत नहीं है। यह मामला सुप्रीमकोर्ट के आदेशों से जुड़ा है। यदि राहत ही मिलनी होती तो अब तक लोग सीएम, सांसद, विधायक समेत आवास विकास के अफसरों से भी मिल चुके हैं, लेकिन किसी ने भी यह आश्वासन नहीं दिया कि आवास विकास मकान नहीें तोड़ेगा। इस प्रकार के बयान केवल भाजपा के कुछ हवाई नेताओं जरूर दिए, ऐसे नेताओं का संगठन और सरकार में कितना वजूद है यह उनके बयानों के बाद भी आवास विकास परिषद की कार्रवाई के बाद साफ हो गया है और ऐसे ही नेताओं से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
राहत का है तरीका
कुछ लोगों का कहना है कि यदि सीएम कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव ले आए कि साल २०२५ तक बने सभी मकानों को कानूनी तौर पर मान्यता दी जाती है और इसके बाद किसी भी इस प्रकार के आवासीय मकान में व्यवसायिक गतिविधि की अनुमति नहीें दी जाएगी इस आश्य का प्रस्ताव यूपी की कैबिनेट में पास करा कर उसको गजट कर दिया जाए। इससे यह कानून बन जाएगा और मेरठ समेत पूरे प्रदेश में जिन भवनों पर ध्वस्तीकरण की तलबार लटकी है उससे सभी को राहत मिल जाएगी। लेकिन ऐसा कोई नेता नजर नहीं आ रहा है जो इस आश्य का प्रस्ताव अपना असर दिखाकर यूपी कैबिनेट से पास कराने की कूबत रखता हो। राहत की बात अब कोई नहीं कर रहा है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के नाम पर राहत के सवाल से भागने का काम जरूर किया जा रहा है।


