मुनि श्री ने बताया मंदिर में चोरी करने वाले कैसे हैं होते

Shekhar Sharma
5 Min Read

आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज ने बताया कि मंदिरों की धन संपदा चोरी करने वाले लोगों की मनोवृत्ति

मेरठ। छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित ऋषभ एकेडमी में पहुंचे राष्ट्र संत आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज ने बताया कि मंदिरों की धन संपदा चोरी करने वाले लोगों की मनोवृत्ति कैसी होती है। मुनि श्री ने ऋषभ एकेडमी में अपने बेहद व्यस्त कार्यक्रम के दौरान शंका समाधान का भी एक छोटा सा सेशन रखा। इन दिनों देश भर में मंदिरों में चढ़ावा चोरी और लूट की घटनाओं को लेकर हिन्दू जनमानस बेहद आहत हैं और ऐसा वो कर रहे हैं जो मंदिरों पर काविज हैं। शंका समाधान कार्यक्रम में मुनिश्री 108 सौरभ सागर जी महाराज से मंदिरों में चढ़ा चोरी की वजह पर ही सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सरल भाव से इस शंका का भी समाधान किया। उन्होंने बताया कि ह्दय में पाप और लोभ उत्पन्न होने और धर्म क्षीण होने की वजह से ऐसा हो रहा है। ऐसा करने वालों को ना तो समाज का भय होता है और ना ही लोकलाज की वो परवाह करते हैं। यहां यह भी स्पष्ट कर दें कि यह सवाल सदर दुर्गाबाड़ी स्थित प्राचीन जैन श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज मंदिर में करीब पांच सौ करोड़ की आंकी जा रही चढ़ावा चोरी के परिपेक्ष्य में पूछा गया था। इससे पहले आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज के मंगल आगमन पर बुधवार को पूरा छावनी क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज सदर से शुरू हुई भव्य अगवानी यात्रा के बाद एकेडमी परिसर में आयोजित ‘गुरु भक्ति का गुणगान’ कार्यक्रम में मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े। मंदिर की प्रबंध समिति के सचिव डा. संजय जैन व अन्य बैड बाजों और सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ मुनि श्री की जय-जयकार करते मुनिश्री को ऋषभ तक लेकर पहुंचे, जहां उनकी सर्वप्रथम आरती की गयी। सत्कार किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में मुख्यत ऋषभ प्रबंध समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्र जैन व राजेन्द्र जैन के अलावा मुख्यत: सचिव डॉ. संजय कुमार जैन, अजय जैन आदि की प्रमुख भूमिका रही।

महाराज श्री के प्रवचन

महाराज श्री ने पंडाल में मौजूद जनसैलाब को संबोधित करते हुए कहा कि मानव को विरासत में धन-दौलत तो मिल सकती है, लेकिन सच्चा ज्ञान और संस्कार केवल गुरु की शरण और स्वाध्याय से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने भौतिकता की दौड़ को छोड़कर आत्मिक शांति की ओर कदम बढ़ाने की प्रेरणा दी। दोपहर बाद करीब तीन बजे इसके उपरांत बहुप्रतीक्षित शंका समाधान सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपनी आध्यात्मिक, पारिवारिक और सामाजिक जिज्ञासाएं महाराज श्री के समक्ष रखीं। आचार्य श्री ने सभी शंकाओं का बेहद सरल और तार्किक उदाहरणों के साथ निवारण किया।

इमोशनल हीलिंग और साउंड हीलिंग

संत आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महाराज मंगल प्रवचनों के बाद द्वितीय सत्र में डॉ. यशिका जैन ने आयुर्वेद के माध्यम से इमोशनल हीलिंग और साउंड हीलिंग विषय पर व्यावहारिक जानकारियां साझा कीं। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले ज्यादातर दंपत्ति थे। जो कार्यक्रम के दौरान बेहद भावुक नजर आए। यह कार्यक्रम बेहद अनुठा रहा।

कविता पाठ

शाम ढलने के बाद देश की सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका जैन अंबर और ख्यातिलब्ध कवि सौरभ जैन सुमन ने मंच संभाला। ‘गुरु भक्ति का गुणगान’ विषय पर केंद्रित इस काव्य संध्या में दोनों रचनाकारों ने वीर रस, अध्यात्म और राष्ट्रचेतना से ओतप्रोत कविताओं से समां बांध दिया। अनामिका जैन अंबर की ओजस्वी पंक्तियों और सौरभ जैन सुमन के सुमधुर गीतों पर पूरा पंडाल देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

TAGGED:
Share This Article