
नगर निगम के वार्ड 13 में महापौर तो मगर आए पानी नहीं ला पाए, लोग तरस रहे पानी को, नगरायुक्त ने लौटा दी फाइल,
दिन भर वार्ड के पार्षद का आवास घेरे रहते हैं पानी की समस्या से परेशान लोग
मेरठ/ महानगर के मलिन इलाकों में शुमार नगर निगम के वार्ड १३ के लोग तीन साल से पानी की बाट जो रहे हैं, लेकिन निगम के जीएम जल के कार्यालय से जो फाइल तैयार कर भेजी गयी थी वो नगरायुक्त कार्यालय ने वापस लौटा दी है। पानी की समस्या के समाधान के नाम पर महापौर हरिकांत अहलूवालिया यूं कहने को दो बार इस वार्ड में पहुंचे, लेकिन वो भी समस्या का समाधान कराने के वादे से आगे नहीं बढ़ पाए। वो खुद तो दो बार आए लेकिन इस वार्ड के भूषण विहार, प्रताप विहार और जयभीम नगर के वाशिंदों के घर तक पानी नहीं पहुंचा सके। आसमान से आग बरसाती मई महीने की इस गर्मी के मौसम में बूंद-बूंद पानी को तरह रहे इन इलाकों के लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है, यदि यहां कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा होती है तो उसके लिए इन इलाकों के लोग नहीं बल्कि नगर निगम प्रशासन के आला अफसर जिम्मेदार होंगे।
सरकार ने तो खोला है खजाना-सीएम योगी ने भेजे 350 करोड़
ऐसा नहीं सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ मेरठ की मलिन बस्तियों के कल्याण के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने तो खजाना खोल दिया है और मेरठ की मलिन बस्तियों में विकास कार्यों के लिए करीब ३५० करोड़ रुपए भेजे हैं। वार्ड के भाजपा पार्षद रामपाल यादव बताते हैं कि नगर निगम के खजाने में मलिन बस्तियों के नाम पर ३५० करोड़ शासन द्वारा भेजे गए हैं, लेकिन इसके बाद भी वार्ड १३ के भूषण विहार, प्रताप विहार और जयभीम नगर तीन साल से शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब चार माह पहले भी महापौर हरिकांत अहलूवालिया पानी की समस्या के समाधान के नाम पर जयभीम नगर आए थे। उन्होंने समस्या का समाधान कराए जाने का वादा किया था। यह बात अलग है कि पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सके। शुद्ध पेजयल की समस्या को लेकर जब हालात बद से बदत्तर हो गए तब उन्होंने महापौर से संपर्क किया। महापौर यहां आए थी, लेकिन समस्या को लेकर इंच भर भी बात आगे नहीं बढ़ सकी। इस वार्ड के लोगों ने बताया कि आजादी के करीब सत्तर साल बाद भी दिल्ली एनसीआर के इस मलिन बस्ती के लोगों को यदि शुद्ध पेयजल भी मय्यसर नहीं तो स्मार्ट सिटी के दावे क्यों। लोगों ने शिकायती लहजे में बताया कि यह हाल तो तब है जब यह वार्ड दक्षिण विधानसभा से विधायक बने योगी सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री डा. सोमेन्द्र तोमर की विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जब स्वतंत्र प्रभार मंत्री के विधानसभा में भी अफसर काम कराने में आनाकानी करेंगे तो फिर काम कहां होगा। या यह मान लिया जाए कि योगी सरकार के मंत्री के इस वार्ड की जानबूझ कर विरोधियों के इशारे पर नगर निगम के अफसरों द्वारा अनदेखी की जा रही है। लोगोंं का कहना है कि वजह भले ही उन्हें शुद्ध पेयजल चाहिए।
क्यों लौटा दी गयी फाइल
नगर निगम के इस वार्ड १३ की पानी की समस्या को लेकर निगम के जीएम जल के कार्यालय से फाइल तैयार कर नगरायुक्त कार्यालय को भिजवायी गयी थी। पार्षद रामपाल यादव ने बताया कि निगम के जेई लाल सिंह सिसौदिया ने उन्हें बताया कि फाइल पर संस्तुति के बजाए नगरायुक्त कार्यालय से वापस लौटा दिया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं कि फाइल पर क्या आपत्ति नगरायुक्त ने लगायी।
लौट देंगे निगम की टीम
इस बीच जानकारी मिली है कि पार्षद रामपाल यादव ने जो प्रस्ताव दिया है उसमें ३५० फुट गहरायी तक खुदाई की बात कही गयी है, जबकि निगम प्रशासन चाहता है कि महज 200 फुट तक खुदाई करा कर काम निपट दिया जाए। इस वार्ड के लोगों ने बताया कि यदि 350 फुट के बजाए 200 फुट पर खुदाई करायी गयी तो निगम की जो टीम इस कार्य के लिए आएगी उसको वापस लौटा दिया जाएगा। क्योंकि 200 फुट की खुदाई से शुद्ध पेयजल की समस्या का समाधान नहीं होने वाला है।
कॉल तक रिसीव नहीं करते
वार्ड की पानी की समस्या को लेकर भाग दौड़ कर रहे पार्षद रामपाल यादव की शिकायत है कि लोगों की परेशानी को देखते हुए वह लगातार महापौर और नगरायुक्त से संपर्क का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हालत इतने ज्यादा खराब है कि एक चुने हुए प्रतिनिधि के द्वारा की जा रही कॉल तक रिसीव नहीं की जा रही हैं। दरअसल पार्षद आज भी नगर निगम पहुंचे थे। उन्होंने जेई से भी बात की, लेकिन नगरायुक्त से उनकी मुलाकात हो नहीं सकी। अब वह सोमवार को नगर निगम में नगरायुक्त से मिलेंगे।


