अफसरों की दो टूक आदेश ही सुप्रीम

Shekhar Sharma
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व्यापारियों की मकान के बदले मकान और दुकान के बदले दुकान की अफसरों से दरकार

मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी और प्रमुख सचिव (आवास एवं नगर विकास) पी. गुरु प्रसाद व्यापारियों से मिले

मेरठ। सुप्रीमकोर्ट का आदेश ही मान्य है। पीड़ित परिवारों को जिस राहत और भरोसे की उम्मीद थी वैसा सीएम के सलाहकार अवनीश अवस्थी और प्रमुख सचिव नगर विकास पी गुरुप्रसाद ने कुछ नहीं कहा। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के दायरे में बंधे होने की लाचारी जताते हुए उसके उसके दायरे में रहकर जो भी समाधान संभव होगा, सरकार उसे लागू करने का प्रयास किए जाने की बात कही। मतलब साफ है कि मकानों पर तोड़फोड़ की तलबार हटी नहीं है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश में जो कुछ कहा गया है वह सब घटनाक्रम पंद्रह दिन में घटना अब तय माना जा रहा है। अवनीश अवस्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वह स्वयं व प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद, आवास आयुक्त, मंडलायुक्त, नगर आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मेरठ पहुंचे हैं। बैठक में महिलाओं ने ‘मकान के बदले मकान’ और ‘दुकान के बदले दुकान’ का ऑफर मिलने की बात कही, लेकिन सेटबैक की कार्रवाई पर कोई आश्वासन नहीं दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है और इसे मानना ही होगा।

पालन होगा सुप्रीम आदेश का

अवनीश अवस्थी ने कहा कि सरकार का पहला दायित्व सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराना है। कोर्ट के आदेश की अवहेलना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रभावित लोगों को राहत देने और स्थायी समाधान निकालने के लिए जो भी संभव सहायता हो सकती है, वह उपलब्ध कराई जाए। सरकार चाहती है कि ऐसा समाधान निकले जिससे अधिकारियों को बार-बार कोर्ट के सामने पेश न होना पड़े और लोगों की समस्या का स्थायी निस्तारण हो सके। दूसरे दौर में उन लोगों से भी चर्चा हुई जिनके भवन सील किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 44 सील संपत्तियों के संबंध में बातचीत हुई है। व्यापारियों ने अधिकारियों से मांग की कि जिन भवनों का नक्शा आवासीय स्वरूप के अनुरूप है और जिन्हें बचाया जा सकता है, उन्हें बचाने का प्रयास किया जाए।

यह हुआ

सेंट्रल मार्केट प्रकरण के समाधान के लिए शुक्रवार को सीएम योगी के सलाहकार अवनीश अवस्थी और प्रमुख सचिव आवास एवं नगर विकास पी. गुरु प्रसाद व्यापारियों और प्रभावित परिवारों से वार्ता करने यहां पहुंचे। दोनों बड़े अफसरों ने कमिश्नरी सभागार में करीब एक घंटे तक चली बैठक में अधिकारियों ने व्यापारियों और महिलाओं की बात सुनीं और दो टूक कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हर हाल में करना होगा। उल्लेखनीय है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि जो अवैध है उसको तोड़ दिया जाए। हालांकि दोनों अफसरों ने यह कहा कि कोर्ट के आदेश के दायरे में रहकर जो भी स्थायी समाधान संभव होगा, सरकार उसे लागू करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। यह प्रयास क्या होगा यह अभी साफ नहीं है। यह मुलाकात अलग-अलग की गयी। पहले ईडब्ल्यूएस और छोटे प्लॉटों से जुड़े प्रभावित परिवारों, खासकर महिलाओं से मिले और फिर उन व्यापारियों से चर्चा हुई, जिनके 44 भूखंडों और भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई हुई है। सुप्रीमाकोर्ट ने सील भवनों को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। हालांकि अफसरों ने कहा कि कई नई योजनाओं और नीतियों पर विचार किया गया है। ऐसे कई स्थान भी चिह्नित किए गए हैं जहां प्रभावित व्यापारियों के लिए स्थायी और अस्थायी दुकानों की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि उनका रोजगार भी चलता रहे और आवासीय व्यवस्था भी पूरी तरह वैध हो सके। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगभग दो महीने का समय दिया है, लेकिन सरकार अगले 10 दिनों के भीतर दोबारा मेरठ आकर समीक्षा करेगी। मंडलायुक्त और जिलाधिकारी ने भी इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

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