उत्पीड़न से व्यापरियों में उबाल, GST कमिश्रर से मिले

Shekhar Sharma
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जीएसटी की जटिलताओं से परेशान व्यापारियों ने वित्त मंत्री के नाम सौंपा 12 सूत्रीय मांग पत्र,अनावश्यक जुर्माने व कर जमा कराने की प्रक्रिया में सुधार सहित जीएसटी नियमों को सरल बनाने की मांग

मेरठ। जीएसटी के अफसरों के उत्पीड़नात्मक रवैये से प्रदेश भर के व्यापारियों में जबरदस्त उबाल है। इसी के चलते आज उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश रजि. के बैनर तले संगठन के प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने ट्रेड एवं जीएसटी से संबंधित विभिन्न गंभीर समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर वित्त मंत्री, भारत सरकार के नाम एक ज्ञापन जीएसटी के एडीशनल कमिश्नर संजय सिंह को सौंपा। ज्ञापन में व्यापारियों एवं उद्योगों को जीएसटी व्यवस्था में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों से राहत देने तथा विभागीय स्तर पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने के लिए 12 सूत्रीय मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।

तकनीकी खामियां उस पर अधिकारियों की मनमानिया

प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों ने सरकार को राजस्व उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन जीएसटी की जटिल प्रक्रियाओं, तकनीकी खामियों और अधिकारियों की मनमानी के कारण व्यापारियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य व्यापार को सरल बनाना होना चाहिए, न कि जटिल नियमों और अनावश्यक कार्यवाहियों के माध्यम से व्यापारी का उत्पीड़न करना। ज्ञापन में मांग की गई कि सचेत दस्तावेजों के आधार पर पूरा टैक्स जमा होने के बावजूद तकनीकी अथवा मानवीय भूल के कारण अनावश्यक जुर्माना न लगाया जाए तथा वाहन रोककर जुर्माना लगाने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही 40 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण से छूट का लाभ वास्तविक रूप से दिया जाए और विभागीय लक्ष्य पूरा करने के लिए कम टर्नओवर वाले व्यापारियों को अनावश्यक रूप से पंजीकरण के लिए बाध्य न किया जाए। व्यापारियों ने एसआईबी की जांच एवं सर्वे के दौरान भारी धनराशि कर के रूप में जमा कराने की प्रथा पर रोक लगाने की भी मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी प्रकार का कर जमा कराने के लिए दबाव बनाया जाना उचित नहीं है और इस संबंध में उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ज्ञापन में जीएसटी के अंतर्गत दुर्घटना बीमा की वर्तमान सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर कम से कम 10 लाख रुपये का बीमा प्रत्येक पंजीकृत व्यापारी को उपलब्ध कराने, पंजीकृत व्यापारियों को डिजिटल कार्य के लिए लैपटॉप/सॉफ्टवेयर नि:शुल्क उपलब्ध कराने, विलंब से भुगतान पर लगाए जा रहे 18 प्रतिशत ब्याज को घटाकर अधिकतम 6 प्रतिशत करने तथा जीएसटी अधिनियम के दंडात्मक प्रावधानों में जेल की सजा समाप्त कर दंड को केवल आर्थिक दंड तक सीमित करने की मांग की गई।

जीएसटी की दरों में भारी अंतर

व्यापारियों ने तंबाकू और तंबाकू पत्ते पर जीएसटी की दरों में भारी अंतर समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि तैयार तंबाकू पर 40 प्रतिशत और तंबाकू पत्ते पर 5 प्रतिशत जीएसटी होने के कारण स्थानीय उद्योग एवं सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है। इसी प्रकार कच्चे माल पर 18 प्रतिशत और तैयार माल पर 5 प्रतिशत जीएसटी की विसंगति को दूर करने की मांग की गई, ताकि व्यापारियों का पैसा लंबे समय तक जीएसटी विभाग में न फंसे और उन्हें रिफंड के लिए विभागीय चक्कर न लगाने पड़ें। ज्ञापन में लंबी दूरी के परिवहन के दौरान ट्रांसपोर्टर द्वारा माल को दूसरे ट्रक में स्थानांतरित करने अथवा ट्रक नंबर बदलने से उत्पन्न ई-वे बिल की समस्या का भी समाधान करने की मांग की गई। व्यापारियों ने कहा कि ट्रांसपोर्टर द्वारा ई-वे बिल-2 जनरेट किए जाने के कारण यदि माल को डबल सेल मानकर कार्रवाई की जाती है, तो उसमें व्यापारी का कोई दोष नहीं होने के बावजूद उसे परेशान किया जाता है। ऐसी स्थिति में व्यापारियों को राहत दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त जीएसटी रिफंड रिटर्न फाइल होने के बाद स्वत: जनरेट कर इनकम टैक्स की भांति व्यापारी के खाते में भेजने, विलंब होने पर ब्याज देने तथा तैयार माल की तुलना में पैकिंग मैटेरियल पर अधिक जीएसटी के कारण प्रभावित होने वाले आईटीसी के लाभ को व्यापारी को उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।

ये रहे मौजूद

एडीशनल कमिश्नर संजय सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि स्थानीय स्तर से संबंधित समस्याओं का त्वरित निस्तारण कराया जाएगा तथा केंद्र सरकार एवं वित्त मंत्रालय से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं और मांगों को उचित माध्यम से वित्त मंत्री तक पहुंचाया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से प्रान्तीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल, जिलाध्यक्ष राजकुमार त्यागी, जिला महामंत्री इसरार सिद्दीकी, रियाज अहमद, राहुल प्रजापति, सुनील मलियाना, निशांत अग्रवाल, ब्रह्मपाल, आकाश कौहली, अतुल त्यागी एवं फरागत राणा सहित अन्य व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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