इतना आसान नहीं था ऋषभ का परचम फहराना

Shekhar Sharma
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दिनश जैन, राजेन्द्र जैन व पवन जैन को हटाने वालों ने ऋभष को बर्बाद करने में नहीं छोड़ी थी कोई कसर, करीब बीस करोड़ के गवन और महिला टीचरों के साथ शर्मनाक व्यवहार

मेरठ। छावनी के वेस्ट एंड रोड स्थित ऋषभ एकाडेमी केवल शिक्षा ही नहीं खेल के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों ने ऋषभ को मेरठ के टॉप पब्लिक स्कूलों की पांत में लाकर खड़ा कर दिया है। आज हालत यह है कि तमाम माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा ऋषभ का स्टूडेंट कहलाए। लेकिन यह उपलब्धी एक दिन या फिर रातों रात हासिल नहीं कर ली गयीं। जिस ऋषभ एकाडेमी का शिक्षा और खेल के जगत में डंका बज रहा है उसको दिन रात एक कर खून पसीने से सींचने का काम सचिव डा. संजय जैन ने किया तब कहीं जाकर ऋषभ इस मुकाम पर पहुंचा है।

लूटने खसोटने वालों की नहीं कमी

ऋषभ एकाडेमी हमेशा से ऐसी नहीं रही है। शुरूआत साल 2013 से कर लेते हैं, जब ऋषभ का संचालन कर रहे राजेन्द्र जैन, दिनश जैन, पवन जैन आदि के खिलाफ रंजीत जैन ने एफआईआर करा दी। राजेन्द्र जैन, दिनेश जैन व पवन जैन आदि पर रंजीत की इस एफआईआर के बाद हड़कंप मचा दिया। किसी ने सोचा नहीं था कि ऐसा भी कोई कर सकता है। खैर जांच हुई। जांच में पुलिस ने एफआर लगायी और एफआर को कोर्ट की मंजूरी मिल गयी। लेकिन एफआईआर कराने वाले रंजीत ने कोर्ट में एफआर का कोई विरोध नहीं किया।

इस्तीफों का सिलसिला

उसके बाद अप्रैल 2014 में राजेन्द्र जैन, दिनेश जैन, पवन जैन आदि के इस्तीफे लिए गए और छह माह के लिए रंजीत जैन को बतौर कार्यवाहक संचालन सौंप दिया गया और शर्त लगा दी गयी कि छह माह में प्रबंध कमेटी के चुनाव करा दिए जाएंगे। लेकिन ऐसा हो ना सका। डिप्टी रजिस्ट्रार के निर्देश पर प्रशासन की देखरेख में हुए चुनाव के बाद सचिव बनाए गए डा. संजय जैन बताते हैं कि इसके उलट वो किया गया जिसको जालसाजी और धोखाधड़ी में शुमार किया जाता है। जिस कृत्य के करने पर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा जाता है। वो सब कृत्य किए गए। नौबत यहीं तक नहीं रहीं बल्कि राजेन्द्र जैन, दिनेश जैन और पवन जैन के इस्तीफाे के बाद जिन श्रेयांश जैन और राकेश जैन को रंजीत साथ लेकर आया था, उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इतना ही नहीं प्रधानाचार्या रीता सिरोही को भी बलात हटा दिया गया। उनके स्थान पर तमाक कायदे कानून ताक पर रखकर याचना भारद्वाज को प्रधानाचार्या बना दिया गया। दरअसल याचना भारद्वाज हाथों की कठपुतली बन गयी थीं। हर गुनाह में बराबर की शरीक थीं। सीबीएसई समेत स्कूलों से संबंधित जितने भी महकमे हैं उन सभी के साथ कथित कुटरचित कागजात तैयार कर धोखाधड़ी में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी गयी। इतना ही नहीं स्कूल की टीचरों के साथ भी वो किया गया जिसको शब्दों में पिरोने में भी शर्म आती है। एक दो नहीं 52 टीचरों ने बताया कि यह सब रंजीत जैन ने किया।

ऐसा कसा गया शिकंजा

ऋषभ के टॉयलेट में सीसीटीवी कैमरे लगाकर आपत्तिजनक फोटो लेने और उन फोटो के जरिये महिला टीचरों को ब्लैक मेल किए जाने के मामले में रंजीत जैन पर पुलिस और कानून का शिकंजा कसवाने का काम भी पीड़ित 52 महिला टीचरों ने ही किया। ये सभी पुलिस के पास पहुंच गयीं। उनकी शिकायत पर रंजीत जैन और उनके पुत्र अभिनव जैन के खिलाफ थाना सदर बाजार पुलिस ने मुकदमा लिखा। मुकदमा ही नहीं लिखा बल्कि पिता पुत्र को अरेस्ट कर सीजेएम की कोर्ट में पेश भी किया। हालांकि वहां से जमानत मिल गयी। लेकिन वो मुकदमा आज भी चल रहा है और रंजीत व अभिनव आज भी जमानत पर ही बाहर हैं। अब यह तो वक्त बताएगा कि कब तक जमानत पर रहेंगे और अदालत से सजा के बाद सलाखों के पीछे पहुंचेंगे। डा. संजय जैन बताते हैं कि वह सत्य मेव जयते को मानने वाले हैं। जिन्होंने ऋषभ के प्रति अपराध किया है। टीचरों के प्रति अपराधिक कृत्य किया है अदालत उन्हें सजा जरूर देंगी।

आसान नहीं थी डा. संजय जैन का सफर

शिक्षा ही नहीं खेलकूद के क्षतिज पर ऋषभ एकाडेमी का परचम फहरा देना कोई आसान काम नहीं था। जिन टीचरों व दूसरे स्टाफ को छह माह तक सेलरी नहीं मिलती थीं उन्हें अब समय पर सेलरी और बढ़ी हुई सेलरी दी जा रही हैं। ऋषभ में बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कक्षा 10 और 12 के परीक्षा परिणाम इस बात के सबूत हैं कि डा. संजय जैन ने दिन रात एक कर ऋषभ के शिक्षा के स्तर के लिए शानदार काम किए हैं। यह सफर डा. संजय जैन के काफी कठिन था क्योंकि सफर में उन्हें उन कांटों काे भी साफ करना था जो उनकी राह में साजिश कर बिछाए गए थे और यह सिलसिला आज भी जारी है, लेकिन डा. संजय जैन का कहना है कि अंतोगत्वा जीत न्याय की ही होनी है क्योंकि सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं।

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