No Talk! ट्रंप को छका रहा है ईरान

Shekhar Sharma
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शांति वार्ता के लिए दूतों जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की पाकिस्तान की नियोजित यात्रा रद्द कर

नई दिल्ली। बातचीत के लिए बुरी तरह से बेताब नजर आ रहे अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान ने एक बार फिर झटका दिया है। अमेरिकनों के पहुंचने से पहले ही ईरान के प्रतिनिधि मंडल ने इस्लामाबाद से रूखसती ले ली है। इसके बाद जिस बातचीत का पूरी दुनिया खासतौर से मिडिल ईस्ट के देशों को इंतजार था वो नहीं होने जा रही है। इस बातचीत के टूट जाने के बाद दुनिया में ईधन की किल्लत की आशंका जतायी जा रही हैं। दुनिया के तमाम देश मान रहे हैं जब तक अमेरिका और ईरान के बीच कडवाहट कायम है जब तक ईरान किसी भी कीमत पर स्ट्रेट हार्मूज का रास्ता नहीं खोलने वाला है। जो भी उसकी मर्जी के खिलाफ वहां से होकर गुजरेगा उसको खत्म कर दिया जाएगा। ईरान ऐसा कर भी रहा है।

ईरान के लिए निकले अराधची

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची उच्च स्तरीय बैठकों में भाग लेने और पाकिस्तानी अधिकारियों को युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान की मांगों की सूची सौंपने के बाद इस्लामाबाद, पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बाद में ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए दूतों जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की पाकिस्तान की नियोजित यात्रा रद्द कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दुनिया परेशान है, हालांकि ईरान पूरी तरह से बेफ्रिक नजर आ रहा है। ईरान की ओर से बातचीत को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई जा रही है। ईरान जान गय है कि बाचतीत अब अमेरिका की मजबूरी बनती जा रही है। ईरान चाहता है कि बातचीत की मुख्य शर्त लेबनान पर इजरायली एयर स्ट्राइक ना होने देने की गांरटी हाेनी चाहिए।

ट्रंप की सुनने को तैयार नहीं लेबनान

अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप यह बात समझ गए हैं कि लेबनान में इजरायल के हमले रोके बगैर ईरान से बाचतीत नहीं हो सकती। वह बार-बार इजरायल को हमले ना करने को कहते हैं, लेकिन इजरायल उनकी बात सुनने को राजी नहीं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान पर अपने हमले जारी रखे हैं, जिसमें याहमोर अल-शाकिफ कस्बे में कम से कम चार लोग मारे गए हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि हिजबुल्लाह के साथ तीन सप्ताह के लिए युद्धविराम बढ़ाए जाने के बावजूद उनकी सेनाओं को लेबनान में हमले जारी रखेगी। फिर इस युद्ध विराम के मायने क्या निकाले जाएं जब हमले ही जारी रहने हैं।

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