टूटने से बचा लेंगे मकान अब अर्पित से हैं आस

Shekhar Sharma
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टूटने से बचा लेंगे मकान अब अर्पित से हैं आस

शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट और आवास विकास के सभी 11 सैक्टरों के 814 मकानों में रहने वालों को उम्मीद है नहीं होगी तोड़फोड़

मेरठ। लड़ाई जिंदगी भर तिनका तिनका जुटा कर बनाए गए आशियाने को बचाने की है। सिस्टम गूंगा बहरा हाे गया है और सिस्टम चलाने वाले पत्थर दिल जिन नेताओं से उम्मीद थी वो निर्लजता पर उतरे हैं। हर बार वादा और हर बार वादा खिलाफी। यह सितम शुरू हुआ जब सैंट्रल मार्केट का 661/6 ध्वस्त किया गया। उसके बाद सेंट्रल मार्केट बेमियादी बंद कर दिया। पीएम व सीएम के आने से एन पहले नेताओं के वादे पर दुकानों के शटर उठा दिए गए, लेकिन जो वादे कर गए थे वो फिर लौटे नहीं। इस बीच आवास विकास ने सितम ढहाना शुरू कर दिया। सैक्टर दो में सैटबैक के नाम पर नोटिस चस्पा कर दिए। फरमान सुना दिए छोटे हो या बड़े आगे पीछे एक एक मीटर मकान तोड़ डालो। महिलाओं ने पूछा ऐसे मकान तोड़ देंगे तो फिर रहेंगे कहा। बजाए परेशानी समझने के दो टूक कह दिया खुद तोड़ो तो ठीक यदि आवास विकास ने तुडवाए तो हर्जाना देना होगा।

सब्र का टूट गया बांध

जब इस प्रकार की बातें की जाने लगीं और मां बहनों के आंसुओं का निर्मम सिस्टम पर कोई असर नहीं हुआ उसके बाद ठान लिया कि नेताओं के भरोसे नहीं खुद के भरोसे ही लड़ाई लड़नी होगी। सैक्टर दो में धरना शुरू हुआ। मां बहनों के इस धरने मेरठ ही नहीं लखनऊ में भी हलचल हुई। जिनकी तलाश की जा रही थी वो खुद पहुंच गए। बगैर कोई ठोस वादा किए धरना खत्म करा दिया ओर फिर पलट कर नहीं आए इस बीच आवास विकास वाले नोटिसों को बादस्तूर चस्पा करते रहे। माता बहने बर्दाश्त भी कहां तक करतीं सौ जा घेरा योगी सरकार के राज्यमंत्री का घर। उम्मीद थी कोई रास्ता निकलेगा। इसके बाद रास्ता कितना निकला और कानूनी लड़ाई किस मुकाम तक पहुंची यह तब तक नहीं कहा जा सकता जब तक राहत ना मिल जाए। अच्छी बात इतनी जरूर हुई कि सुप्रीमकोर्ट में सीनियर अधिवक्ता सलमान खुर्शीद एक पैसे की फीस पर यह मुकदमा लड़ने को राजी हो गए। सैक्टर दो और तीन में दोबारा धरना शुरू हो गया।

आर या पार

जिंदगी भर की कमाई से सिर छिपाने को आशियाना बचाने की यह लड़ाई अब आर या पार के मुकान पर है। इसी आस के साथ अर्पित मोगा पर भरोसा जताया है। और उम्मीद भी कर रहे हैं कि वो वादा कर लौटकर नहीं आए अर्पित मोगा वैसा नहीं साबित होंगे। माता बहनों के आशियाने बजाने की इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचकर जो विश्वास उन पर काम किया है, उसकी भी लाज रखेंगे। इसमें कोई दो राय नहीं कि लड़ाई मुश्किल है और यह भी सच है कि इसके लिए जितना कर सकते हैं उससे ज्यादा माता बहनें हिम्मत दिखा चुकी हैं।

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